लन्ड देख भड़की मेरी चूत की प्यास


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हैलो फ्रेंड्स मैं चंचला.. मेरी उम्र 28 साल है.. मैं अभी अपने पति के साथ दिल्ली में रहती हूँ। मेरी चूचियों की साइज़ 36 इन्च है.. गाण्ड 38 इंच की है और मस्त बलखाती हुई कमर है। मैं शुरू से थोड़ी भरी हुई देह की हूँ.. और बहुत गोरी व सुन्दर हूँ। जब मैं स्कूल जाती थी.. तो लड़के मेरी गाण्ड और मम्मों को देख कर आहें भरते थे। लेकिन मैं पढ़ने में लगी रहती थी। मेरी शादी 24 साल के होने पर हो गई थी। यह बात तब की है.. जब मैं शादी के एक महीने बाद गाँव गई थी। मैं कार से अपने गाँव जा रही थी.. मेरा भाई कार ड्राइव कर रहा था.. जिसकी उम्र 20 साल की है। दिल्ली से निकलने के बाद हम लोग तेज़ी से जा रहे थे.. तब मुझे ज़ोर की सूसू लगी।

उस वक्त शाम के 6 बज रहे थे.. अँधेरा हो चला था। भाई ने जैसे ही गाड़ी रोकी.. तो कुछ मनचले लड़के आने लगे.. एकदम सुनसान इलाका था। मैं बोली- रात हो गई है.. कहीं रुक जाते हैं.. कुछ दूर बाद एक छोटा ढाबा मिला, हम लोगों ने रुक कर पूछा कि रात भर रुकना है कोई व्यवस्था है? ढाबे में सिर्फ़ दो लोग थे.. जिसमें से भी नौकर जा रहा था.. जो वहाँ का मालिक था.. वो बोला- नज़दीक में मेरा घर है.. वहीं चलो.. हम लोग वहाँ से चल दिए.. ढाबा मालिक की उम्र 40 साल के लगभग थी। जब हम लोग वहाँ गए तो वो चाय पिलाने लगे भाई ने चाय पी.. लेकिन मैंने चुपके से फेंक दी।

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तब तक हम तीनों में बातें होने लगीं। खूसट ने अपनी स्टोरी बताई कि उसकी बीवी नहीं है.. बच्चे दूसरे शहर में रहते हैं वगैरह.. करीब एक घन्टे बाद भाई सोने चला गया.. तो अंकल ने कहा- बेटी तुम दूसरे कमरे में सो जाओ.. मैं सोने चली गई। अब लगभग रात 11 बज रहे थे.. तो मुझे कोई आवाज़ सुनाई दे और मैंने देखा कि अंकल जी भाई को शराब पिला रहे हैं जबकि वो मना कर था। मैं कुछ नहीं बोली और सो गई.. अभी नींद लग ही रही थी कि अंकल कमरे में आए और लाइट ऑन कर दी। मैं चुपके से देख रही थी। फिर अंकल ने फोन निकाल कर किसी से पूछा कि दवा का असर कितनी देर में शुरू होता है? फिर और कुछ बात की और कमरे से निकल गए।

मैं पीछे-पीछे गई और देखा कि वो भाई को जगा रहे हैं.. शायद चैक कर रहे थे। लेकिन भाई सोया रहा.. तब वो वापस दोबारा मेरे कमरे की तरफ आने लगे। मैं जल्दी ही आकर सो गई.. वो कमरे को बंद करके डरते हुए मेरे पास आकर मेरी गाण्ड को छूने लगे। मैं कुछ नहीं बोली.. फिर वो मेरे मम्मों को पकड़ने लगे.. मैं जाग गई और चिल्लाने लगी.. तो वो बोले- यहाँ कोई नहीं आने वाला और तेरे भाई को मैंने नशे में कर दिया है.. मैं बोली- अंकल आप यहाँ से चले जाइए.. तो वो बोले- ठीक है.. लेकिन एक शर्त है.. कि तुम मुझे बस ऊपर से करने दोगी..

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मैं मजबूरी में राज़ी हो गई और एक वजह और थी कि.. मेरे पति मुझे रोज नहीं सुख देते थे.. उन्होंने एक महीने में सिर्फ़ 10 बार ही मेरे साथ सम्भोग किया था.. जिसकी वहज से मैं भी थोड़ा मजा चाहती थी। फिर अंकल मुझे पकड़ लिया और चूमने लगे.. कुछ देर बाद मैं मदहोश होने लगी.. तो अंकल ने मुझे नंगा करना चाहा.. वो मेरी सलवार खोलने लगे।मैं उन्हें बोलने लगी.. तो मेरे हाथ पकड़ कर मेरे मुँह में लंड पेल दिया।जब मैंने उनका लंड देखा.. तो मेरे होश उड़ गए। मैं अंकल से कामुक होकर बोली- अब मैं ऊपर से नहीं.. सब कुछ करवाऊँगी.. और मैं उनका मूसल मजे से चूसने लगी.. अंकल बोले- बहुत दिन बाद आज किसी अच्छी औरत की चूत चोदूँगा..

मैं पूरी तरह नंगी हो गई और वो मुझे.. बेटी बोलते हुए मेरी गाण्ड देखने लगे, बोले- बहुत मस्त गाण्ड है.. मुझे तुम्हारी जैसी मोटी गाण्ड पसंद है..बस फिर क्या था अंकल ने मेरी चूत के चीथड़े उड़ा दिए मैंने भी दम से अपनी चूत की प्यास बुझवा ली। इसके बाद जो हुआ वो मेरे लिए एक नया अनुभव था उसको मैं फिर कभी लिखूंगी। दोस्तो, चुदाई के वृतांत को खोल कर लिखने में जो मजा होता है वह उस बात में होता है कि चुदाई की स्थितियां कैसे बनीं.. जोकि मैंने आपको बताया। मुझे उम्मीद है कि आप सभी को मेरी ये सत्य घटना पसंद आई होगी।

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